क्या था लक्ष्मण का अयोध्या के लिए त्याग | अर्था । आध्यात्मिक विचार | रामनवमी स्पेशल 2017

क्या था लक्ष्मण का अयोध्या के लिए त्याग | अर्था । आध्यात्मिक विचार | रामनवमी स्पेशल 2017

हम सभी जानते हैं कि लक्ष्मण ने अपने सुख कि चिंता किये बग़ैर किस प्रकार भगवान राम और देवी सीता के साथ वनवास पर चले गए. जबकि वनवास से लौटने के बाद उनके त्याग को हिन्दू इतिहास में कम श्रेय दिया गया. महाकाव्य रामायण में इस चरित्र के सम्बन्ध में कई उदाहरण मिलते हैं जबकि दूसरे पौराणिक कथाओं यह कम सराहे गए हैं. br br Don't forget to Share, Like & Comment on this videobr br Subscribe Our Channel Artha : br br १ एक कथा के अनुसार, भगवान राम एक बार यम देव के साथ मुलाकात कर रहे थे जो गोपनीय होनी चाहिए थी. br br २ यम देव ने भगवान राम से एक वचन माँगा कि जो भी कमरे में प्रवेश करे उसे मृत्यु दंड दिया जाए br br ३ उन्होंने लक्ष्मण को राम जी के कमरे कि निगरानी करने के लिए कहा ताकि कोई बात चीत में बाधा ना डालेbr br ४ उसी समय, ऋषि दुर्वासा अयोध्या पधारे और भगवान राम के साथ मुलाकात की मांग की.br br ५ जब लक्ष्मण ने नम्रता पूर्वक ऋषि दुर्वासा को इंतज़ार करने के लिए कहा, वह गुस्सा हो गए और धमकी दी कि वो सारे अयोध्या को श्राप दे देंगेbr br ६ अयोध्या को बचाने के लिए ऋषि दुर्वासा के शब्दों का मान रखने के लिए, लक्ष्मण ने वीरता से अपने जीवन का त्याग करने का फैसला कियाbr br ७. उन्होंने दरवाज़ा खोला और अपने भाई को दुर्वासा के आने की जानकारी दी और उनकी राम से मिलने की इच्छा बतायी.br br ८. कुछ ग्रंथो का दावा है कि यम ने भगवान राम पर जोर देकर उन्हें वनवास पर भेजने के लिए कहा जो दोनों भाइयों के लिए पीड़ादायक था br br ९ अपने भाई के शब्दों का मान रखते हुए , लक्ष्मण ने अयोध्या छोड़ी और सरयू नदी के वीरान किनारे पर चले गये.br br १०. वही पर उन्होंने अपने जीवन को ध्यान में मग्न कर दिया और समाधी प्राप्त कर ली.


User: Artha

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Uploaded: 2019-02-05

Duration: 02:32