जहाँ दुःख का साक्षात्कार नहीं, वहाँ कोई बदलाव नहीं || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)

जहाँ दुःख का साक्षात्कार नहीं, वहाँ कोई बदलाव नहीं || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)

वीडियो जानकारी:br br शब्दयोग सत्संगbr १० मई, २०१७br अद्वैत बोधस्थल, नोएडाbr br दोहा:br कबीर रसरी पाँव में, कहँ सोवै सुख चैन।br साँस नगाड़ा कूँच का, बाजत है दिन रैन ॥ (संत कबीर)br br प्रसंग:br क्या सुख की आकांशा ही दुःख का कारण है?br दुःख का क्या निजात है?br जहाँ दुःख का साक्षात्कार नहीं, वहाँ कोई बदलाव नहींbr "कबीर रसरी पाँव में, कहँ सोवै सुख चैन" इस दोहे में "रसरी" का क्या आशय है?


User: आचार्य प्रशान्त

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Uploaded: 2019-11-29

Duration: 22:37