राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की आवाज में (थक कर बैठ गए साथी मंजिल दूर)

राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की आवाज में (थक कर बैठ गए साथी मंजिल दूर)

इस कविता में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने मनुष्य को बताया है कि विपत्ति में कभी हार कर नहीं बैठना चाहिए।


User: Chordata Mahesh

Views: 2

Uploaded: 2023-06-21

Duration: 01:53