निराकार साधना या साकार साधना - क्या श्रेष्ठ है? || आचार्य प्रशांत, भक्तियोग पर (2017)

निराकार साधना या साकार साधना - क्या श्रेष्ठ है? || आचार्य प्रशांत, भक्तियोग पर (2017)

प्रसंग:br br ~ अर्जुन उवाचbr एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते।br ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः॥ (१)br br ~ श्रीभगवानुवाचbr मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते।br श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः॥ (२)br br ये त्वक्षरमनिर्देश्यमव्यक्तं पर्युपासते।br सर्वत्रगमचिन्त्यं च कूटस्थमचलं ध्रुवम्‌॥ (३)br br सन्नियम्येन्द्रियग्रामं सर्वत्र समबुद्धयः।br ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः॥ (४)br br क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम्‌।br अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्भिरवाप्यते॥ (५)br br ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि सन्नयस्य मत्पराः।br अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते॥ (६)br br तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्‌।br भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्‌॥ (७)br br संगीत: मिलिंद दातेbr ~~~~~


User: आचार्य प्रशान्त

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Uploaded: 2024-01-02

Duration: 01:36:37