(गीता-29) अर्जुन का एक भोला सवाल, और श्रीकृष्ण का अद्भुत जवाब|| आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)

(गीता-29) अर्जुन का एक भोला सवाल, और श्रीकृष्ण का अद्भुत जवाब|| आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)

वीडियो जानकारी: 09.11.23, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा br br प्रसंग: br ~ झूठी पहचान से नुकसान क्या हैं?br ~ कैसे खुद की मान्यताएँ समझने में बाधा है?br ~ कौन सच नहीं देख सकता?br ~ कामना कभी शांत क्यों नहीं होती?br ~ कैसे संसार अहंकार का विस्तार है?br ~ हमें क्या दिखाई देता है?br br br भवोऽयं भावनामात्त्रो न किंचित् परमर्थतः । नास्त्यभावः स्वभावनां भावाभावविभाविनाम् ॥br ~ अष्टावक्र गीता, 18.4br br जागो लोगों मत सुवो, ना करो नींद से प्यार। जैसे सपना रैन का, ऐसा यह संसार।।br ~ संत कबीरbr br धूमेनाव्रियते वह्निर्यथादर्शी मलेन च । यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम् ॥ br जिस प्रकार अग्नि धुएँ से ढकी रहती है, दर्पण धूल से ढका रहता है और उदरस्थ गर्भ जरायु से ढका रहता है (माँ के गर्भ में जो बच्चा होता है वो झिल्ली और उसके भीतर पानी से ढका रहता है), उसी तरह 'काम' से विवेक और ज्ञान ढका रहता है। ~ ~ श्रीमद्भगवद्गीता, 3.38br br जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ।br ~ रामचरितमानसbr br संसार के कुलज्ञान के, मूल में बस काम है नित्य हो निष्काम हो निर्द्वद हो, जो सत्यस्थ है आत्मवान हैbr ~ श्रीमद्भगवद्गीता, 3.


User: आचार्य प्रशान्त

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Uploaded: 2024-11-26

Duration: 01:26:22